जवाब लेने चले थे, सवाल ही भूल गए! अजीब है ये इश्क भी, अपना हाल भी भूल गए!!

जिंदगी में कुछ हसीन पल यूंही गुजर जाते हैं रह जाती हैं यादें और इंसान बिछड़ जाते हैं।

इश्क़ खुदकुशी का धंधा है, “अपनी ही लाश अपना ही कंधा है”

लाख चाहूं कि तुझे याद ना करूं मगर, इरादा अपनी जगह, बेबसी अपनी जगह..!!

वक्त की तरह निकल गया वो, नजदीक से भी और तकदीर से भी..!

“गम” ये लफ्ज़ कहने में तो कम लगता है लेकिन दोस्तों सहने में बड़ा दम लगता है।

कहीं जीत तो कहीं हार के निशान हैं, कौन जाने, हम कितने दिन के मेहमान हैं।

बड़ी अजीब होती हैं ये यादें कभी हंसा देती हैं कभी रुला देती हैं।