ALLAMA IQBAL SHAYARI

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं तही ज़िंदगी से नहीं ये फ़ज़ाएँ यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं

तिरे सीने में दम है दिल नहीं है तिरा दिल गर्मी-ए-महफ़िल नहीं है गुज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर चराग़-ए-राह है मंज़िल नहीं है

ज़लाम-ए-बहर में खो कर सँभल जा तड़प जा पेच खा-खा कर बदल जा नहीं साहिल तिरी किस्मत में ऐ मौज ! उभर कर जिस तरफ चाहे निकल जा !

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को कि मैं आप का सामना चाहता हूँ

तेरी दुआ से कज़ा तो बदल नहीं सकती मगर है इस से यह मुमकिन की तू बदल जाये तेरी दुआ है की हो तेरी आरज़ू पूरी मेरी दुआ है तेरी आरज़ू बदल जाये